तुम हो

अक्सर सोचा करती हूं कि लफ़्ज़ क्यो बेवफ़ाई करते हैं अरमानों को अल्फ़ाज़ों में बयां करने से क्यो डरते हैं पर फ़िर दिल को इस बात से सुकून है कि तुम हो मेरी खामोशियों को अल्फ़ाज़ देते हुए……. तुम हो आंखों में बुने ख्वाबों को पढ़ते हुए…….. तुम हो और क्योंकि ‌तुम हो इन लफ़्ज़ोंContinue reading “तुम हो”