तुम हो

अक्सर सोचा करती हूं कि लफ़्ज़ क्यो बेवफ़ाई करते हैं अरमानों को अल्फ़ाज़ों में बयां करने से क्यो डरते हैं पर फ़िर दिल को इस बात से सुकून है कि तुम हो मेरी खामोशियों को अल्फ़ाज़ देते हुए……. तुम हो आंखों में बुने ख्वाबों को पढ़ते हुए…….. तुम हो और क्योंकि ‌तुम हो इन लफ़्ज़ोंContinue reading “तुम हो”

उलझन / Labyrinth

दिल का दर्द भी वही और दवा पर भी उन्हीं का नाम कौन कहता है मोहब्बत की राह है आसान Translation The wounds of her heart Had the same name written on them Which she had given to the balm Love is not linear But a labyrinthine path © Sakshi Gangwani

ऐसा तो नहीं (Recital)

कुछ कहने को न हो ऐसा तो नहीं बस अल्फ़ाज़ ख़र्च करने का मन नहीं एहसासों की कमी हो ऐसा भी नहीं बस जताने का मन नहीं खुद को समझ ना पाए ऐसा तो नहीं बस आज समझाने का मन नहीं कलम उठाए बैठे हैं बस लिखने का मन नहीं दुनिया से कोई शिकायत होContinue reading “ऐसा तो नहीं (Recital)”

अल्फ़ाज़ो के पिंजरे

मोहब्बत बयां करने की कोशिश में कहीं अल्फ़ाज़ो के जाल में जस्बात गुम ना जाए। कहने और सुनने का फासला तय करने में कहीं कुछ आधा अधुरा सा न रह जाए। करने चले थे वफ़ा पर कहीं बेवफ़ाई का दाग न लग जाए। पर सोचते हैं गर नज़रें उठाकर देख लें वो तो शायद अल्फ़ाज़ोContinue reading “अल्फ़ाज़ो के पिंजरे”

तुम हो/ You by my side

तुम हो इतना बहुत है आस पास ना‌ भी सही हर एहसास में ही सही पर तुम हो इतना बहुत है जो हम दोनों के बीच है वो दुनिया के लिए सिर्फ रूमानी सही पर रहेगा तो वो रूहानी ही तुम हो बस इतना बहुत है। Translation When you are by side Then there isContinue reading “तुम हो/ You by my side”

बेवजह/Needless

ज़िन्दगी ने खफ़ा होने की वजह तो बहुत दी पर जिस दिन से तुम से मुलाकात हुई वो हर वजह बेवजह सी लगने लगी English translation There were many reasons to stay angry with life but meeting you made each of those reasons needless © Sakshi Gangwani

मुठ्ठी भर/ Fistful

एक बंद मुट्ठी में रुकी गीली मिट्टी जितनी ख्वाहिशें है कुछ ज़्यादा तो नहीं हर ख्वाहिश पूरी ही‌ हो ऐसी कोई शर्त नहीं बस ख्वाबों पर बंदिश ना हो मोहब्बत की कोई हद ना हो सरहदें ज़मीन से मिट ना भी सके तो कोई ग़म नहीं बस दिलों में लकीरों की गुंजाइश ना हो एकContinue reading “मुठ्ठी भर/ Fistful”

Irreversible/ Achal

Zindagi se Koi shikayat nahi Gar wo Yun na hoti Toh hum yahan na hote Yeh kagaz Kalam ki siyaahi mein dooba na hota Gar ghum na hota Toh shayar na hote Mohabbat na hoti toh Ibaadat na hoti Aasun na hote Toh muskuraahat ki kadr na hoti Gar Zindagi seedhi si chalti Toh AeyContinue reading “Irreversible/ Achal”